
[ अजय कुमार ]
दुनिया की सबसे बड़ी डोमेन सेलर कंपनी को डर है कि भारत की फ़ेक साइट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई से इंटरनेट को नुकसान हो सकता है।
- भारत के फ़ैसले इंटरनेट गवर्नेंस के काम करने के तरीके को बदल रहा है…
- दस्तावेज़ों से पता चलता है कि गोडैडी (GoDaddy) और दूसरे डोमेन बेचने वाली कंपनियों ने चिंता जताई है…
- भारत साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को लेकर चिंतित रहा है…
- गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल कहा था कि भारत में हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर क्राइम का शिकार होता है…
- इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या एक “राष्ट्रीय संकट” बन सकती है…
- गोडैडी को इन निर्देशों से बिज़नेस पर बुरा असर पड़ने का डर है…
नई दिल्ली :
दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट डोमेन बेचने वाली कंपनी, GoDaddy ने चेतावनी दी है कि मशहूर ब्रांड्स की नकल करने वाली फ़ेक वेबसाइट्स के ख़िलाफ़ भारत की सख़्त कार्रवाई से असली बिज़नेस के लिए इंटरनेट कम सुरक्षित हो जाएगा और इसके ग्लोबल असर भी होंगे।
भारत में आनलाइन धोखाधड़ी के मामले बढ़े
दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे पिछले साल कथित साइबर धोखाधड़ी की 24 लाख शिकायतें मिली थीं, जिनकी कुल रकम 2.4 बिलियन डॉलर (₹ 2,28,51,72,00,000=00) थी।
संबंधित कंपनियां
- GoDaddy Inc
- Merriam-Webster
- Amazon.com Inc
- Colgate-Palmolive Co
- McDonald’s Corp
- Microsoft Corp
- Unilever PLC
- Xiaomi Corp
कंपनियों के मुकदमे
2019 से, दर्जनों भारतीय और ग्लोबल कंपनियों ने मुकदमे किए, जैसे अमेज़न ने अपने नाम का इस्तेमाल करने वाली नकली शॉपिंग साइट्स के खिलाफ और मैकडॉनल्ड्स ने फ़्रैंचाइज़ी देने का दावा करने वाली नकली साइट्स के खिलाफ शिकायत की। दिसंबर में, एक भारतीय अदालत ने ऐसी 1,100 से ज़्यादा वेबसाइट्स पर रोक लगा दी।
नकली वेबसाइट पर प्रतिबंध – दिल्ली हाईकोर्ट
हालांकि, नई दिल्ली के जज ने इससे भी आगे बढ़कर कई नए और बड़े कदम उठाने का आदेश दिया। टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन कदमों ने इंटरनेट गवर्नेंस के नियमों को ही बदल दिया है, डोमेन बेचने वालों को खरीददारों को डिफ़ॉल्ट रूप से मुफ़्त प्राइवेसी प्रोटेक्शन नहीं देना चाहिए, खरीदार की जानकारी “सही वजह” रखने वाले किसी भी व्यक्ति को 72 घंटे के अंदर दी जानी चाहिए और ऐसी वेबसाइट के एड्रेस पर रोक लगनी चाहिए जो सुरक्षित ब्रांड नामों से मिलते-जुलते हों।
बिजनेस पर असर
रॉयटर्स के अनुसार कुछ प्राइवेट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, अमेरिका की कंपनी GoDaddy (GDDY.N) ने दिल्ली हाई कोर्ट की जजों की एक बड़ी बेंच के सामने इन आदेशों को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि इस फैसले का असर उन सही-सलामत बिज़नेस पर पड़ेगा जिनके नाम बड़े ब्रांड्स से मिलते-जुलते हैं।
प्राइवेसी और सिक्योरिटी से बड़े खतरे
GoDaddy ने कहा कार ‘प्राइवेसी-बाय-डिफ़ॉल्ट’ फ़ीचर्स को रोकने से वेबसाइट के असली मालिकों का नाम, पता, फ़ोन नंबर और ईमेल सबके सामने आ जाएगा, जिससे उन्हें पीछा किए जाने (स्टॉकिंग) और परेशान किए जाने जैसे “प्राइवेसी और सिक्योरिटी से जुड़े संभावित खतरों” का सामना करना पड़ सकता है।
इसमें कहा गया है कि चूंकि डोमेन नेम दुनिया भर में काम करते हैं, न कि सिर्फ़ किसी एक जगह पर, इसलिए इस आदेश की वजह से GoDaddy को दुनिया भर में वेबसाइट एड्रेस को रेगुलेट करना पड़ सकता है।
सही वजह बताने पर कंपनी जानकारी उपलब्ध करायें
कोर्ट ने आदेश दिया है कि कंपनियां “सही वजह” (legitimate interest) बताने वाले किसी भी व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन की जानकारी दें। इस पर GoDaddy का कहना है कि उसके पास यह पता लगाने का कोई तरीका नहीं है कि किसका मकसद सही है और किसका नहीं।
GoDaddy की अपील के 5,121 पेज के दस्तावेज़ों में से एक में कहा गया है कि “कारोबार को अस्थिर करने वाले” ये निर्देश डोमेन नेम कंपनियों को “भारत छोड़ने” पर मजबूर कर सकते हैं।
भारत सरकार और GoDaddy ने रॉयटर्स के ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें उनसे इस मामले पर टिप्पणी मांगी गई थी।
बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के ज़रिया
5 बिलियन डॉलर के सालाना रेवेन्यू वाली कंपनी GoDaddy 8 करोड़ डोमेन मैनेज करती है और 2 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स को सेवा देती है। 2024 में, कंपनी के अधिकारियों ने कहा था कि उभरते बाज़ार में भारत उनका सबसे बड़ा क्षेत्र है।
अदालत के रिकॉर्ड से पता चलता है कि GoDaddy की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों – एरिज़ोना की Namecheap और नीदरलैंड की Hosting Concepts ने भी नई दिल्ली के फ़ैसले को चुनौती दी है, हालाँकि रॉयटर्स उनकी अपीलों के बारे में पूरी जानकारी का पता नहीं लगा सका। इन कंपनियों ने रॉयटर्स के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।
गोडैडी और अन्य कंपनियों का विवाद
GoDaddy और दूसरी कंपनियों के बीच कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब 20 से ज़्यादा कंपनियों ने अपने ब्रांड को नुकसान पहुँचाने वाली फ़र्ज़ी वेबसाइटों के मामले में कोर्ट से दखल देने की मांग की। इन कंपनियों में Amazon (AMZN.O), McDonald’s (MCD.N), Microsoft (MSFT.O), Xiaomi (1810.HK) और Colgate-Palmolive (CL.N) शामिल थीं। इनमें से किसी भी कंपनी ने राइटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।
दिसंबर 2025 के फैसले में फर्जी वेबसाइटों को “बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का जरिया” बताया गया था।
अदालत ने 14 उपाय सुझाये
अदालत द्वारा सुझाए गए 14 उपायों में से एक में कहा गया है कि डोमेन खरीदार के पंजीकरण विवरण को छुपाने की सुविधा अब एक सशुल्क सेवा के रूप में पेश की जानी चाहिए, क्योंकि यह सुविधा धोखेबाज ऑपरेटरों की पहचान छिपाने के लिए “एक आवरण” का काम करती है।
अदालत का आदेश अभी भी लागू है, इसके बावजूद GoDaddy की वेबसाइट अभी भी अपनी पेशकश का प्रचार इस तरह कर रही है कि इसमें “हमेशा के लिए मुफ्त गोपनीयता सुरक्षा… हम सार्वजनिक निर्देशिका से आपका नाम, पता, फोन नंबर और ईमेल हटा देते हैं” शामिल है।
प्राइवेसी फीचर को हटाना उचित नहीं
GoDaddy का तर्क है कि प्राइवेसी फ़ीचर को कमज़ोर करना भारत के डेटा सुरक्षा कानून और यूरोपियन यूनियन के जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) कानून के ख़िलाफ़ होगा, जो “प्राइवेसी बाय डिफ़ॉल्ट” (शुरुआत से ही प्राइवेसी) के तरीके को ज़रूरी बनाता है।
इंटरनेट गवर्नेंस पर रिसर्च करने वाली न्यूयॉर्क की फ़र्ज़ानेह बदी ने नई दिल्ली के फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यूरोप ने ऐसी जानकारियों को छिपा दिया था क्योंकि उनके पब्लिश होने से लोगों को परेशान करने और टारगेटेड फ़िशिंग के लिए उनका गलत इस्तेमाल किया गया था।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों की जानकारी सामने आएगी, वे पत्रकार, एक्टिविस्ट, छोटे बिज़नेस के मालिक और आम लोग होंगे। ब्रांड की नकल करने वाले लोग नहीं।”
GoDaddy का कहना है कि ‘McDonald’ एक आम नाम है
भारत सरकार चिंतित
मोदी सरकार के गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल कहा था कि भारत में हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर क्राइम का शिकार होता है और अगर इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या एक “राष्ट्रीय संकट” बन सकती है।
दस्तावेज़ों से पता चलता है कि दिसंबर 2025 में जारी किए गए व्यापक निर्देश भले ही अदालत ने दिए थे, लेकिन वे सरकार की दलीलों पर आधारित थे।
अदालत को गलत जानकारी दी गयी
GoDaddy की हालिया अपील के कागज़ात में 2023 का आईटी मंत्रालय का एक ऐसा दस्तावेज़ शामिल है, जिसे पहले सार्वजनिक नहीं किया गया था। इस 59 पन्नों के दस्तावेज़ से पता चलता है कि नई दिल्ली ने जज को बताया था कि वह “डोमेन नेम के गलत इस्तेमाल” और “सख्त वेरिफिकेशन की कमी” को लेकर चिंतित है।
साइबर क्राइम से निपटने की ज़िम्मेदारी संभालने वाले गृह मंत्रालय ने जज से कहा कि जांच के लिए रजिस्ट्रेशन की जानकारी “आसानी से उपलब्ध” होनी चाहिए।
कंपनियों और मोदी सरकार के बीच मतभेद
यह रुख़ हाल के वर्षों में ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ मोदी के कड़े मतभेदों और झगड़ों के अनुरूप है। नई दिल्ली ने मेटा, ट्वीटर (X), गूगल और टेलीग्राम जैसी कंपनियों की बार-बार आलोचना की है और कुछ मामलों में तो अदालतों का दरवाज़ा भी खटखटाया है क्योंकि ये कंपनियाँ ऐसे कंटेंट पर नज़र रखने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठातीं जिन्हें सरकार राष्ट्रीय हितों के ख़िलाफ़ मानती है।
मैकडॉनल्ड्स (MCD.N) द्वारा लाए गए एक मामले में, कंपनी ने mcdonaldsfranchiseindia.com जैसी 110 वेबसाइटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की, इनमें से कुछ वेबसाइटें कंपनी के ‘गोल्डन आर्च’ लोगो का इस्तेमाल कर रही थीं और “भारी रकम” लेकर नकली फ़्रैंचाइज़ी बेच रही थीं।
कुछ मुश्किलें…लागू करना ठीक नहीं
उन्हें ब्लॉक करने के बाद, GoDaddy का कहना है कि एक बार ट्रेडमार्क (जैसे McDonald’s) के सुरक्षित हो जाने पर उसके अल्फ़ान्यूमेरिक वेरिएशन (अक्षर और नंबर वाले अलग-अलग रूप) पेश करने पर कोर्ट की अतिरिक्त रोक “ब्लैंकेट इंजेक्शन” (व्यापक रोक) की तरह काम करेगी, जिसे लागू करना मुश्किल है।
GoDaddy ने कहा कि “McDonald” शब्द स्कॉटिश मूल का है और इसका मतलब “दुनिया के शासक का बेटा” होता है। कंपनी ने आगे कहा कि इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने से असल में एक आम नाम पर एकाधिकार बन जाएगा, जिसका भाषाई और ऐतिहासिक महत्व है।
मिलते-जुलते नामों से ज्यादा परेशानी
रॉयटर्स ने पाया कि mcdonalds-india-franchise.com जैसे डोमेन अभी भी GoDaddy India पर लगभग 10 डॉलर में उपलब्ध करेंगे। अमेरिका की इस बड़ी कंपनी ने मेरियम-वेबस्टर की वेबसाइट से जुटाई गई रिसर्च भी पेश की। इसमें तर्क दिया गया कि “HUL” (जो यूनिलीवर की भारतीय यूनिट है) जैसे सुरक्षित ट्रेडमार्क के अलग-अलग रूपों को सुरक्षित करने पर, वे 118 ऐसे अंग्रेज़ी शब्दों से टकरा सकते हैं जिनमें ये अक्षर आते हैं, जैसे “hulk” और “moghul”।
गोडैडी का कहना है कि “किसी ऐसे अंग्रेज़ी शब्द वाला डोमेन नेम रजिस्टर करना लगभग नामुमकिन है जो किसी रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क से न टकराता हो।”
जज 16 जुलाई को इन अपीलों पर सुनवाई करेंगे।
(Reuters)…