महा-बंदरों का बंदरबांट

Spread the love

[ अजय कुमार ]

नवंबर 2000 में मध्य प्रदेश का विभाजन हुआ और छत्तीसगढ़ का निर्माण हुआ।

  • राज्य में बंटवारा हुआ…
  • जनता दलों में बंटी…
  • नेताओं में भ्रष्टाचार का धन बंटा…
  • ब्यूरोकेट्स में भी बटा-बंटी का हुआ खेल…
  • जनता का शरीर टुकड़े टुकड़े कर बांटना बचा है…
  • अब जमीनों की बंदरबांट…

गरीब विधायकों-सांसदों के लिए…
छत्तीसगढ़ का निर्माण होने के बाद 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ विधानसभा में गरीब विधायकों और गरीब संसद सदस्यों को, बाजार मूल्य से कम कीमत पर मकान और महल बनाने के लिए विधानसभा में एक प्रस्ताव लाया गया, जिसे कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने मेज थपथपाकर उसका जबरदस्त स्वागत करते हुए उसे पास कर दिया और यह कानून बन गया।

बस यहीं से छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर की कीमती जमीनों की बंदरबांट का शुभारंभ हुआ और जब यह प्रक्रिया प्रारंभ हुई तो ब्यूरोक्रेट्स ने कहा कि हम पीछे क्यों रहे और उन्होंने भी गंगा में डुबकी लगा ही ली…

निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के निवास की जिम्मेदारी विधानसभा सचिवालय की
वैसे प्रदेश के 90 विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश की जनता अपने जनप्रतिनिधि को मतदान कर विधायक के रूप में रायपुर भेजती है वह भी सिर्फ 5 वर्ष के लिए और जब वह 5 वर्ष का अपना कार्यकाल राजधानी रायपुर में पूरा करते हैं उन्हें छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय के माध्यम से 5 वर्ष उनके रहने के लिए मकान, फ्लैट उपलब्ध कराती है या फिर विधायकों को यह भी अधिकार दिया गया है कि वह किराए के मकान 5 वर्ष के लिए ले लें, छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय उसका 5 वर्ष तक भुगतान करेंगे। यह प्रक्रिया आज भी जारी है।

मकान-महल की जरूरत क्यों
तो फिर जब जनता 5 वर्ष के लिए निर्वाचित करके जनप्रतिनिधि को राजधानी रायपुर भेजती है तो सरकार और सचिवालय विधानसभा उनकी पूरी रहने की व्यवस्था करती है तो उसके बाद स्थाई रूप से उन्हें राजधानी रायपुर में मकान और महल बनाने के लिए प्लाॅट की क्यों आवश्यकता पड़ी और सरकार ने यह गलत निर्णय क्यों लिया, यह तुरंत बंद होना चाहिए।

अबतक लाभान्वित गरीब नेतागण
2000 से 2003 तक और 2003 से 2008 तक इस 8 वर्ष में छत्तीसगढ़ के विधायकों और संसद सदस्यों जिनकी संख्या 108 है, जिन्हें गरीब ही कहा जा सकता है, उन्होंने कीमती जमीन पानी के मोल, उपरोक्त योजना के तहत पुरैना गांव, जो शहर से लगा हुआ है में प्राप्त की।

2008 से 2013 तक शहर के अंदर धर्मपुरा में 55 गरीब विधायकों और संसद सदस्यों ने गंगा में डुबकी लगा लिए, छत्तीसगढ़ के कुछ ब्यूरोकेट्स ने भी कीमती जमीन पानी के मोल, खरीद लिए।

2013 से 2018 तक राजधानी रायपुर से लगा हुआ सेरीखेड़ी गांव में 61 गरीब विधायकों और संसद सदस्यों ने कीमती जमीन नाममात्र कीमतों पर खरीद ली।

2018 से 2023 तक सेरीखेडी फेस टू में 55 गरीब विधायकों और संसद सदस्यों ने कीमती जमीन पानी के मोल खरीद ली।

गरीब नेताओं के घरौंदे लिए, गरीबों का घोंसला तोड़ दिया गया
वर्तमान में जो विवाद की स्थिति बनी हुई है, उसमें एनआरडीए नया रायपुर के नकटी गांव में जहां 53 गरीब विधायकों और संसद सदस्यों को मकान और महल बनाने के लिए प्लाट देने की योजना को अमल में लाने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी, जबकि यह जमीन चारागाह के लिए आरक्षित जमीन है और जिसे ग्रामीणों ने अतिक्रमण किया है, बोलकर हटाया गया, जबकि ग्रामीणों के पूर्वजों ने ही उपरोक्त कार्य अर्थात् चारागाह के लिए अपनी जमीन दान की थी।

नकटी गांव को ग्रामीणों का अतिक्रमण बताते हुए रात्रि 3:00 बजे रायपुर जिला प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार उपरोक्त योजना के तहत सुरक्षित की गई जमीन का मद परिवर्तन कर आवासीय नहीं बनाया जा सकता। लेकिन एनआरडीए का तर्क है कि अब यह जमीन उसके अंतर्गत आ चुकी है और शहरी क्षेत्र में आ चुकी है, अब यह ग्रामीण क्षेत्र में नहीं है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन यहां लागू नहीं होती, गजब का तर्क दिया है नया रायपुर विकास प्राधिकरण ने।

नकटी गांव पर नाक-कटे माफियाओं की गिद्ध नजर
नकटी गांव से राजधानी रायपुर का एयरपोर्ट सिर्फ 7 से 8 किलोमीटर की दूरी पर है और शहर के नामी बिल्डर लोगों के भी नजर इस गांव और इस गांव के आसपास की जमीनों में लग गई है और कुछ मंत्रियों की भी नजर लगी हुई है। रायपुर संसद सदस्य बृजमोहन अग्रवाल के विरोध के बावजूद भी रात्रि 3:00 बजे अतिक्रमण के नाम पर बुलडोजर चला दिया गया।

अबतक 279 गरीब नेतागणों को मिला लाभ
अभी तक छत्तीसगढ़ निर्माण 2000 में होने के बाद, 2023 तक प्रदेश के निर्वाचित 279 गरीब विधायकों और संसद सदस्यों को उपरोक्त योजना के तहत कीमती और महंगी जमीन मामूली कीमत पर प्राप्त कर चुके हैं, आश्चर्य की बात यह है कि इस खसोट में ब्यूरोक्रेट भी शामिल हो चुका है।

सबसे आश्चर्य बात यह है कि उपरोक्त विधानसभा में पास प्रस्ताव के अनुसार कीमती जमीन कम मूल्य पर जब उपलब्ध हो रही है तो उसका लाभ उठाना चाहिए। कई निर्वाचित जनप्रतिनिधि प्लाॅट और उस पर बने मकान को बेचकर वापस अपने विधानसभा क्षेत्र में जा चुके हैं।

नया रायपुर के ग्राम नकटी के संबंध में हुये पत्राचारों की सूची –
1- सचिव आवास एवं पर्यावरण विभाग का कलेक्टर रायपुर को लिखा गया पत्र (04/10/2024)

2- सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र (30/06/2025)

3- सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा आवास मंत्री ओपी चौधरी को लिखा गया पत्र (10/01/2026)

4- सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा कलेक्टर रायपुर को लिखा गया पत्र (27/01/2026)

5- आवास मंत्री ओपी चौधरी द्वारा सांसद बृजमोहन अग्रवाल को लिखा गया पत्र (02/02/2026)

जनता को विरोध करना ही होगा
क्या यह सही है? इस पर विचार छत्तीसगढ़ की जनता को करना होगा और क्या यह कानून बने रहना चाहिए, इसे समाप्त नहीं किया जाना चाहिए! क्योंकि जमीन सिर्फ 5 वर्ष के लिए निर्वाचित विधायकों और संसद सदस्यों को देने का नियम बनाया गया, नेताओं को बहुमत इसीलिए मिलता है क्या? विधानसभा में कोई भी कानून बना दो और बंदरबांट कर लो।

जनसाधारण को विचार जरूर करना चाहिए, अगर आज आप मौन रहे, तो कल कुछ भी बहुमत के आधार पर विधानसभा में कानून बनाकर प्रदेश में लागू किया जा सकता है। बहुमत का ऐसा दुरुपयोग नहीं होना चाहिए, बहुमत का उपयोग सरकार बनाने के बाद प्रदेश का सर्वांगीण विकास और जनता की समस्या का निराकरण होना चाहिए…


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *