विभागों में सप्लाई : सामग्री सप्लाई या रुपया सप्लाई

Spread the love

[ अजय कुमार ]

  • सप-लाई और पढ़-आई – अब स्कूली शिक्षा विभाग में…
  • बड़ा अजब और गजब चल रहा है…
  • पहले से मंत्रियों ने भूमिका बना ली…
  • स्कूली शिक्षा विभाग में स्मार्ट क्लास तैयार करना है…
  • प्रक्रिया ऐसी… कि पहले मंत्री संत्री स्मार्ट होंगे फिर स्कूली बच्चे…
  • जेम के माध्यम से टेंडर…
  • ₹200 करोड़ का टेंडर…

मंत्रियों ने पहले बनायी भूमिका
पिछली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री से चार मंत्री मिले, जिनके विभाग में बड़ी मात्रा में सैकड़ो करोड़ रुपयों की खरीदी होती है और मुख्यमंत्री से कहा कि मीडिया ट्रायल के कारण सप्लायर पीछे हट रहे हैं काम करने में परेशानी जा रही है, मुख्यमंत्री का निर्देश और सुझाव सामग्रियों की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए एवं अनियमितता नहीं होनी चाहिए और मीडिया ट्रायल से बिल्कुल ना डरा जावे, विभागों को अपना काम करना चाहिए, भ्रष्टाचार से बचना चाहिए।
स्कूली शिक्षा विभाग में ₹200 करोड़ का टेंडर
लेकिन बहुचर्चित स्कूली शिक्षा विभाग में इसी बीच लगभग 200 करोड रुपए की खरीदी का टेंडर, जेम के माध्यम से प्रक्रिया प्रारंभ कर चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद स्कूली शिक्षा विभाग में जो 6 या 7 मगरमच्छ सप्लायर सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं, वहां दूसरों की एंट्री बंद है या घुसने ही नहीं दिया जाता और ये सप्लायर योजनाबद्ध तरीके से, रिंग बनाकर या फिर सीधे मिलिभगत कर अरबों का हथिया लेते हैं, उपरोक्त टेंडर पाने के लिए ताकत लगा चुके अन्य सप्लायर, अबतक विफल रहे हैं। असफल सप्लायर बताते हैं कि सरकार के मुख्य बंगले और स्कूली शिक्षा विभाग के बंगले में सारी बातचीत हो चुकी है, वे और विभाग के अधिकारी भी मगरमच्छों के समक्ष नतमस्तक है।
जीरो टाॅलिरेंस या…
मुख्यमंत्री की यह घोषणा कि जीरो भ्रष्टाचार मुक्त शासन, प्रदेश में कब लागू होगा, 29 महीनों की सरकार में नजर तो नहीं आ रहा है मात्र 31 महीने और बाकी है।
पार्टी नेताओं के बोल…
अब तो भारतीय जनता पार्टी के लोग ही बोलने लगे हैं कि प्रदेश में भ्रष्टाचार अब समुंदर में तैरने लगा है ब्यूरोक्रेट्स हावी हैं।
मीडिया की आंखें…
लेकिन तीसरी आंख मीडिया भी सक्रिय है, किन्तु ब्यूरोकेट्स इस बात को पसंद नहीं कर रहे है, कहना है मि मीडिया हमें सलाह देगा कि किस सप्लायर से खरीदना है और किस नहीं खरीदना है मीडिया का काम है कि अगर गलत हुआ है और हो रहा है, तो उसे उजागर करे, सलाह ना दे।
टेंडर : निम्न सामग्रियों के लिए
छत्तीसगढ़ के 7500 स्कूलों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) लैब स्थापित करने और उनके लिए कंप्यूटर, प्रिंटर, फर्नीचर आदि इत्यादि की खरीद के लिए 68 करोड़ रुपये का बजट, समग्र शिक्षा योजना के तहत स्वीकृत किया गया है।

इस परियोजना का उद्देश्य, सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना और डिजिटल अंतर को पाटना है, 7500 स्कूलों के लिए 68 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसमें कंप्यूटर, प्रिंटर, प्रोजेक्टर, यूपीएस, एंटीवायरस और लैब के लिए विशेष फर्नीचर एवं लैब केबलिंग शामिल हैं।
जेम (GeM) माध्यम बना
यह परियोजना मुख्य रूप से गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया के द्वारा खरीदी की जा रही है, जिसमें 5 साल तक की व्यापक ऑन-साइट वारंटी शामिल है।

प्रदेश में 10,000 स्मार्ट क्लास रूम तैयार किए जाने है, जिसमें 1,25,000 की दर से एलईडी टीवी पैनल लगाए जाएंगे, जिसका कुल लागत ₹125 करोड़ है।
केन्द्रीय योजना के तहत


छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए और ग्रामीण और वनांचल (अनुसूचित क्षेत्रों) के सरकारी स्कूलों में भी शहरों जैसी आधुनिक शिक्षा प्रदान करना ही लक्ष्य है। इन स्मार्ट कक्षाओं में डिजिटल कंटेंट, ई-लर्निंग मॉड्यूल, वीडियो लेक्चर और इंटरैक्टिव पढ़ाई की सुविधा होगी।

स्कूलों में स्मार्ट टीवी के साथ-साथ कंप्यूटर की सुविधा भी दी जाएगी। यह पहल छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और छात्रों को डिजिटल कौशल से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
समग्र शिक्षा अभियान में मिले केन्द्र से फंड
समग्र शिक्षा के आईसीटी और डिजिटल पहल घटक में कक्षा छठी से बारहवीं तक के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालय शामिल हैं

परियोजना स्कूलों को 21वीं सदी के कौशल के लिए तैयार करने के उद्देश्य से की जा रही है, जो विशेष रूप से ग्रामीण और आकांक्षी जिलों पर ध्यान केंद्रित करती है।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *