क्या देश में अंदर ही अंदर परिसीमन प्रक्रिया जारी है…

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[बालमुकुंद शर्मा]

नई दिल्ली :
केंद्रीय चुनाव आयोग और नई दिल्ली के शासकीय सूत्र के साथ, केंद्रीय भाजपा कार्यालय नई दिल्ली और छत्तीसगढ़ के अति विश्वसनीय प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंदर ही अंदर केंद्र शासन के निर्देश पर परिसीमन आयोग¹ विधानसभा और लोकसभा की प्रक्रिया त्वरित गति से जारी है।

  1. (2020 में जम्मू-कश्मीर और कुछ अन्य राज्यों के लिए गठित परिसीमन आयोग की अध्यक्षा न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई थीं, उनकी टीम)

विधानसभा चुनावों के बाद…
असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, के साथ केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद, कभी भी केंद्रीय सरकार परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है और परिसीमन आयोग मिल्खा सिंह से ज्यादा तेज दौड़ते हुए परिसीमन की प्रक्रिया में फाइल आगे बढ़ाएगी और जनसुनवाई करने के बाद, प्रशासनिक अधिकारियों से राज्यों में चर्चा करने के बाद, यह आयोग शासन को रिपोर्ट देगी और पूर्ण संभावना है कि 2027 में नए परिसीमन के अनुसार विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
छत्तीसगढ़ में परीसीमन
परिसीमन की प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ भी शामिल है, छत्तीसगढ़ में भी 90 विधानसभा के स्थान पर 120 से 130 विधानसभा क्षेत्र हो सकते हैं और 11 लोकसभा क्षेत्र के स्थान पर 14 या 15 लोकसभा क्षेत्र हो सकते हैं।
परिसीमन से सदस्यों की संख्या बढ़ेगी
लोकसभा में भी पूरे देश भर का मिलाकर 700 से अधिक सदस्यों की संख्या हो सकती है। सभी सूत्रों के अनुसार, हो सकता है कि 2028 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव, नए परिसीमित विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार हो और 2029 में लोकसभा के चुनाव नए परिसीमित लोकसभा क्षेत्रों के अनुसार हो सकता है।
प्रशासनिक अमला सक्रिय : शासन मौन
फिलहाल प्रशासन सक्रिय है और शासन मौन, किन्तु फाइलों का मूवमेंट तेजी से हो रहा है।

बता दें कि परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत प्रत्येक राज्य में लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के लिए सीटों की संख्या और उनके प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित की जाती हैं।
भारत में अब तक चार बार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है, 1952, 1963, 1973 और 2002 में।
परिसीमन के लिए संवैधानिक उपबंध
अनुच्छेद 82 और 170, संसद द्वारा अवधारित प्राधिकारी और रीति से प्रत्येक राज्य का प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों) में पुनः समायोजन और विभाजन का प्रावधान है।

अनुच्छेद 330 और 332 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या का पुनर्निर्धारण किये जाने का उल्लेख है।


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