[ अजय कुमार ]
- इंसान बड़ा या मंत्री
- इंसानियत बड़ी या राजनीति
- जयंती बड़ी या मरंती
- स्वर्णवासी बड़े या नरक-वासी
मंत्री के संज्ञान में …फिर भी...
सक्ति जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में आज 14 अप्रैल को दोपहर 2 बजे बड़ा हादसा हुआ, जिसमें अबतक 22 मजदूरों मौत हो जाने की तात्कालिक सूचना लखन लाल देवांगन को हो गयी थी। मंत्री के कार्यक्रम स्थल और घटना स्थल की दूरी मात्र 41-42 किलोमीटर है, फिर भी मंत्री लखन लाल ने मोदी सोच समझ की भाजपाई रणनीति अर्थात मोदी का अनुसरण किया।
याद करें …पुलमामा कांड…
आपको याद होगा कि जब पुलवामा में आतंकी हमला 14 फरवरी 2019 को हुआ था, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ने सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे।
इस हमले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में एक फिल्म की शूटिंग (डिस्कवरी चैनल के ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’) में फोटोग्राफी में व्यस्त थे।
मंत्री जी थे… कार्यक्रम में व्यस्त
इसी प्रकार छत्तीसगढ़ के उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन सक्ती जिले के पड़ोसी जिला जांजगीर जिले में मौजूद थे,
मंत्री के कार्यक्रम स्थल और घटना स्थल की दूरी मात्र 41-42 किलोमीटर है। अंबेडकर जयंती के कार्यक्रमों में व्यस्त रहे।
उन्हे कार्यक्रम के दौरान ही आधिकारिक जानकारी मिल चुकी थी, किन्तु पत्रकारों के पूछने पर कह दिया कि मामले की जांच के आदेश दे दिया गया है, कब आदेश हुआ, ये नहीं बताये, इसके बाद भी उन्होंने अपने किसी भी कार्यकम को छोड़ा नहीं, वे एक के बाद एक, लोकार्पण, उद्घाटन और अंबेडकर जयंती के समारोह में शामिल होते रहे और तो और वे जिस वेदांता समूह के पावर प्लांट में हादसा हुआ है, उसी समूह के बालकों स्थित वेदांता स्किल स्कूल के परिसर में आयोजित अंबेडकर जयंती समारोह में शामिल हुए।
पहले भी हो चुका था, बड़ा हादसा

आपको याद दिला दूं कि इसी वेदांता समूह के ही कोरबा स्थित बालकों के पावर प्लांट की चिमनी, 15 साल पहले निर्माण पश्चात गिर गई थी और 40 मजदूर मारे गए थे ।
न्याय…फिलहाल तक जय श्रीराम…
आज तक इस मामले में पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है। मामला अभी निचली अदालत में ही गवाही-गवाही के दौर में लंबित है।
आईसीयू में न्याय…
जैसा कि पूरे हमारे भारत देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को मालूम है कि भारतीय न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्तम्भ है, फिर भी, जनसाधारण की उम्मीद आईसीयू में जिंदा है।
अब जब न्यायंत्रि-मंत्री-संत्री-कंत्री-कैमरांत्रि-कलमांत्रि सारे साथ-साथ और हमथाली हैं, तो पीड़ितों की परवाह कौन करेगा, भाजपा नीत शासन में यह अति महत्वपूर्ण प्रश्नों के साथ अनुत्तरित मामला है।