[अजय कुमार]
इज़राइल-ईरान संघर्ष की वजह से देश में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस कमी के चलते इंडक्शन कुकर की मांग में ज़बरदस्त उछाल आया है, कई इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर्स ने बताया है कि उनके पास इंडक्शन स्टोव का स्टॉक खत्म हो गया है, अब कंपनियां मांग में अचानक आई इस तेज़ी को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स डीलरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकर की बिक्री में 400-500 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि इंडक्शन कुकर बनाने में इस्तेमाल होने वाला ज़्यादातर कच्चा माल चीन से आता है।
नतीजतन, नई सप्लाई आने में करीब 45 दिन लग सकते हैं, जिससे कंपनियों के लिए उत्पादन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।
लोगों ने कहा : ईद पर खाना कैसे बनेगा, इंडक्शन ही एकमात्र सहारा है
बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक्स बाज़ारों में इंडक्शन स्टोव खरीददारों की भीड़ बढ़ गई है। एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते, कई परिवार एहतियात के तौर पर इंडक्शन कुकटॉप खरीद रहे हैं।
मांग का अंदाज़ा लगाने के लिए, दैनिक भास्कर सहित कई मीडिया संस्थानों ने स्थानीय बाज़ार का दौरा किया। एक मुस्लिम महिला ने कहा, “हमारा परिवार बड़ा है, इसलिए मैं एक साथ तीन इंडक्शन कुकटॉप खरीद रही हूं।”
सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ इंडक्शन की कीमतें भी बढ़ गई हैं। जो इंडक्शन पिछले महीने 2,200 रुपये का था, अब उसकी कीमत लगभग 3,000 रुपये हो गई है। आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
त्यौहारों के दिन : रमजान और नवरात्रि साथ साथ
19 मार्च से चैत्र नवरात्रि पहला दिन है, ज्योतिषानुसार इस नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 हिंदू नववर्ष की शुरुआत में दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं, लेकिन माता का पालकी¹ पर आगमन और रौद्र संवत्सर चिंता बढ़ा रहे हैं, यह नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 है)।
रमज़ान चल रहा है, और हर शाम इफ़्तारी के लिए घर पर खाना बनाना ज़रूरी होता है। ईद की तैयारियाँ भी करनी हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर एक इंडक्शन कुकटॉप खरीदना पड़ा,” महिलाओं ने कहा। गैस सिलेंडर की सप्लाई में कमी से परेशान हैं।
- हिन्दू मतानुसार जब माता दुर्गा पालकी (डोली) पर सवार होकर आती हैं, तो यह धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सामान्यतः शुभ संकेत नहीं माना जाता है। यह वाहन महामारी, बीमारी, सामाजिक अशांति, आर्थिक मंदी या प्राकृतिक आपदाओं के संकेत के रूप में देखा जाता है, जो देश-दुनिया में संघर्ष का समय ला सकता है।
भोपाल में एक इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम के मालिक ने कहा, “जो सामान आमतौर पर हर हफ़्ते या दस दिन में आता था, अब उसे रोज़ ऑर्डर करना पड़ रहा है। डीलर स्वयं ज़्यादा कीमतों पर खरीद रहे हैं, इसलिए ग्राहकों को भी ज़्यादा कीमतों पर ही बेचना पड़ रहा है। हालाँकि कोशिश कर रहे हैं कि ज़रूरत के इस समय में हम ज़्यादा मुनाफ़ा न कमाएँ।
जानकारों के अनुसार गर्मियों में इंडक्शन स्टोव की बिक्री कम और एयर कंडीशनर, कूलर, रेफ़्रिजरेटर और पंखों जैसे उत्पादों की मांग होती है।
अब, एलपीजी को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाज़ार के चलन को पूरी तरह से बदल दिया है।
सिर्फ़ पाँच दिनों में एक महीने से ज़्यादा की इंडक्शन बिक्री
मुंबई और मध्य प्रदेश में फिलिप्स के जिम्मेदार अधिकारी ने कहा, एलपीजी की कमी की ख़बरों के बीच, इंडक्शन कुकटॉप एक बेहतर विकल्प के तौर पर सामने आए हैं। लोग एहतियातन इन्हें खरीदना शुरू कर चुके हैं। नतीजतन, इनकी मांग में लगभग 400-500 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सप्लाई बनाए रखने के लिए बढ़ती मांग को पूरा करने की कोशिश किया जा रहा है।
इस बीच, हैदराबाद में उषा इंटरनेशनल लिमिटेड के डिप्टी सेल्स मैनेजर ने बताया कि आम तौर पर एक महीने में 1,000 इंडक्शन यूनिट बिकती हैं, तो पिछले पाँच दिनों में ही लगभग 8,000 से 10,000 यूनिट बिक चुकी हैं। इसका मतलब है कि मांग 8 से 10 गुना बढ़ गई है। इंडक्शन कैटेगरी के कई ब्रांड इस समय कच्चे माल की कमी का सामना कर रहे हैं। चूंकि बाज़ार में कई छोटे और असंगठित ब्रांड हैं, इसलिए सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है।
कोविडकाल जैसी स्थितियाँ : बाज़ार में अचानक तेज़ी
केनस्टार के तमिलनाडु स्टेट हेड का कहना है कि मौजूदा हालात कोविडकाल की याद दिलाते हैं, जब इलेक्ट्रॉनिक किचन अप्लायंसेज की माँग में ज़बरदस्त उछाल आया था। इंडक्शन और इंफ्रारेड की बिक्री का यह दौर बिल्कुल कोरोना काल के जैसा ही है, जब माइक्रोवेव और डिशवॉशर की मांग अचानक से बढ़ गई थी। अब भी वैसी ही अचानक बढ़ोतरी देखा जा रहा है। पहले ही दिन 7,000 से ज़्यादा यूनिट्स बेच दीं।
कंपनियों के लिए सप्लाई और कच्चे माल की खरीद एक चुनौती
मांग में अचानक आई तेज़ी ने इंडक्शन स्टोव बनाने वाली कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। उत्पादन बढ़ाने के लिए कच्चे माल, फ़ैक्टरी की क्षमता और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स की सावधानीपूर्वक योजना बनाना ज़रूरी है। डीलरों ने चेतावनी दी है कि अगर मांग इसी रफ़्तार से बढ़ती रही, तो बाज़ार में इंडक्शन स्टोव की सप्लाई कुछ समय तक सीमित रह सकती है।
गुजरात में उषा इंटरनेशनल लिमिटेड के ब्रांच मैनेजर ने कहा, “इंडक्शन स्टोव बनाने में इस्तेमाल होने वाला लगभग सारा कच्चा माल चीन से आता है, खासकर हीट प्लेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स। इसका नतीजा यह है कि चीन में बढ़ती मांग का असर भारतीय बाज़ार पर पड़ रहा है। कंपनियों के लिए यह एक अप्रत्याशित संकट है। वे चीन में सप्लाई सेंटर्स के साथ लगातार संपर्क में हैं, लेकिन नए ऑर्डर की खेप आने में लगभग 45 दिन लग सकते हैं।” डीलरों के मुताबिक, अकेले फिलिप्स ब्रांड के लिए ही एक लाख से ज़्यादा यूनिट्स की मांग पहले ही मिल चुकी है। कंपनियाँ फिलहाल अपने मौजूदा स्टॉक का इस्तेमाल करके प्रोडक्शन बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।
काॅमर्सियल इंडन्शन के उत्पादन पर कंपनियों का ध्यान
एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए, कई कंपनियाँ अब कमर्शियल किचन के लिए बड़े इंडक्शन सिस्टम विकसित कर रही हैं। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि होटलों और बड़े पैमाने के किचन के लिए अलग से कमर्शियल इंडक्शन यूनिट बनाने की योजनाएँ चल रही हैं।
हालात सामान्य होने पर कीमतों में गिरावट की उम्मीद
इलेक्ट्रॉनिक्स डीलरों का मानना है कि मांग में मौजूदा उछाल अस्थायी है। एक बार गैस सिलेंडरों की आपूर्ति स्थिर हो जाने पर, लोगों की चिंताएं कम होने की संभावना है और इंडक्शन कुकरों की मांग धीरे-धीरे कम हो जानी चाहिए।
दुकानदारों का यह भी कहना है कि कई ग्राहक एयर कंडीशनर या कूलर खरीदने के इरादे से आते हैं, लेकिन गैस की आपूर्ति को लेकर मौजूदा चिंताओं के कारण, वे पहले इंडक्शन कुकर खरीद रहे हैं।
भारतीय रेलवे और अन्य संगठन इंडक्शन की ओर रुख कर रहे हैं
एलपीजी की कमी के बीच, रेलवे ने निर्देश जारी किए हैं कि ज़रूरत पड़ने पर माइक्रोवेव और इंडक्शन जैसे खाना पकाने के तरीकों का इस्तेमाल किया जाए। हालाँकि, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लिए संगठन के ग्राहक संबंध प्रबंधन का कहना है कि अभी एलपीजी की कोई कमी नहीं है, और इंडक्शन का इस्तेमाल पहले की तरह ही जारी है।
किचन के कामकाज में खास बदलाव की ज़रूरत नहीं पड़ी है
इस बीच, दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रोफ़ेसर डॉ. के. जी. सुरेश ने कहा कि उनका संस्थान भी एहतियात के तौर पर हॉट प्लेट, इलेक्ट्रिक ओवन और अन्य उपकरण खरीद रहा है। उन्होंने कहा, “सरकार ने यह साफ़ कर दिया है कि देश में ऊर्जा का कोई संकट नहीं है। अगर भविष्य में कोई आपात स्थिति आती है, तो हमें उसके लिए तैयार रहना चाहिए।”
प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने काटी चांदी
भारत में पीएनजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता कंपनियों में गुजरात गैस लिमिटेड, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड, महानगर गैस लिमिटेड, और अदानी टोटल गैस, गेल गैस लिमिटेड हैं, केन्द्र सरकार द्वारा 8 मार्च को जब एस्मा लगाया गया, उसके दूसरे दिन से ये कंपनियां चांदी काटने लगी, 6-8 हजार का पीएनजी कनेक्शन 15-18 हजार में बेचे गये।