
[ अजय कुमार ]
- राजनीतिज्ञों को पतली चमड़ी का नहीं होना चाहिए…
- राजनीतिक व्यंग्य को मानहानि नहीं कहा जा सकता…
- हास्यपूर्ण आलोचना को स्वतः मानहानि नहीं माना जा सकता…
- राजनीतिक दल के नेता के फैसले आलोचना को आमंत्रित करते हैं…
नई दिल्ली :
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि राजनेताओं को राजनीतिक व्यंग्य (Political Satire) सहन करना होगा और राजनीतिक फैसलों, गठबंधनों या नीतियों पर की गई हास्यपूर्ण आलोचना को स्वतः मानहानि नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को सत्ता के साथ-साथ आलोचना और व्यंग्य का भी सामना करना पड़ता है।
भाजपा नेता के खिलाफ टिप्पणी पर सुनवाई
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने यह टिप्पणी भाजपा सांसद राघव चड्ढा द्वारा सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
कोर्ट ने कहा कि राजनीति में गठबंधन बदलने, नीतियों और शासन पर व्यंग्य करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। किसी भी राजनीतिक दल के नेता के फैसले आलोचना को आमंत्रित करते हैं और कई बार यह आलोचना व्यंग्य के रूप में भी सामने आती है। केवल इस आधार पर कि किसी नेता की आलोचना की गई है, उसे मानहानिकारक नहीं माना जा सकता।
अश्लीलता अभद्रतता स्वीकार्य नहीं
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अश्लील, अभद्र और स्पष्ट रूप से आपत्तिजनक (Obscene and Explicit) सामग्री अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आती। कोर्ट ने राघव चड्डा के खिलाफ पोस्ट की गई ऐसी पांच सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया, जिन्हें उसने अश्लील और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला पाया।
डीपफेक वीडियो या मॉर्ल्ड तस्वीरों का समर्थन नहीं
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अदालत एआई से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो या मॉर्ल्ड तस्वीरों का समर्थन नहीं करती, यदि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति की गरिमा को नुकसान पहुंचाना हो। हालांकि, अदालत ने माना कि आज के समय में एआई का इस्तेमाल राजनीतिक विचार व्यक्त करने के लिए भी किया जा रहा है। ऐसे मामलों में अदालत का दायित्व है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा के अधिकार के बीच संतुलन बनाए।
नेताओं को पतली चमड़ी का नहीं होना चाहिए
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति को इतना पतली चमड़ी (Thin-skinned) नहीं होना चाहिए कि वह अपने हर राजनीतिक फैसले पर होने वाली आलोचना को मानहानि मान ले। अदालत ने कहा कि नेताओं को अपनी आलोचना को विनम्रता से स्वीकार करना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
(Live Law)