जज तबस्सुम ख़ान को सुरक्षा दें : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Spread the love

[ अजय कुमार ]

  • मॉब लिंचिंग में सज़ा सुनाने पर मिल रही थीं धमकियाँ
  • नर्मदापुरम जिले में पदस्थ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को दी गयी धमकी

नर्मदापुरम/जबलपुर :
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि धमकियों से जजों के निर्भीक काम करने में बाधा आती है, डीजीपी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (गृह) को व्यक्तिगत रूप से जानकारी देने उच्च न्यायालय ने निर्देशित किया है।

धमनियां न्याय व्यवस्था में बाधा डालती हैं
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी जज के ख़िलाफ़ नफरती अभियान की कड़ी निंदा की है।
मॉब लिंचिंग मामले में उम्रकैद की सजा सुनाने वाली जज तबस्सुम खान को धमकियाँ मिलने पर अब एमपी हाई कोर्ट ने सरकार को सुरक्षा देने को कहा है। अदालत ने कहा कि किसी न्यायाधीश को उसके फ़ैसले के कारण धमकाना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जजों के निर्भीक होकर काम करने की क्षमता पर सीधा असर डालता है।

हाई कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी और अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (गृह) से भी जवाब मांगा है कि धमकी देने वालों के ख़िलाफ़ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को केवल इसलिए धमकाया नहीं जा सकता है क्योंकि उनके द्वारा दिया गया फ़ैसला समाज के किसी वर्ग को पसंद नहीं आया। अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘हमारा मानना है कि इस तरह की हरकतें न्यायपालिका की स्वतंत्रता और हमारे न्यायिक अधिकारियों के निर्भीक होकर काम करने में सीधे तौर पर बाधा डालती हैं।’

हाई कोर्ट की पीठ ने आगे कहा, ‘यदि किसी न्यायिक अधिकारी के आदेश से कोई पक्ष असहमत है, तो उसके लिए कानून में अपील या पुनरीक्षण जैसे कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। लेकिन केवल इसलिए कि किसी न्यायिक अधिकारी ने ऐसा आदेश पारित किया जो समाज के किसी वर्ग को पसंद नहीं आया, उसे धमकाया नहीं जा सकता।’

जज की सुरक्षा जारी रखने का निर्देश
मामले में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जज तबस्सुम खान को पहले ही पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है।

सुरक्षा देने के पुलिस के दावे के बाद हाई कोर्ट ने नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह न्यायाधीश की सुरक्षा जारी रखें और हलफनामा दाखिल कर यह भी बताएं कि धमकी देने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

डीजीपी और गृह विभाग से मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि सोशल मीडिया पर धमकियां देने और नफ़रत फैलाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ अब तक क्या क़दम उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने अदालत को बताया कि इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

14 आरोपियों को आजीवन कारावास
नर्मदापुरम जिले में पदस्थ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने 12 जून को वर्ष 2022 के मॉब लिंचिंग के दो मामलों में 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। ये दोनों मामले ट्रक चालक शेख लाला नजीर अहमद की हत्या से जुड़े थे। अगस्त 2022 में नजीर अहमद को मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में कथित तौर पर गो-तस्करी के संदेह में भीड़ ने बुरी तरह पीटा था। बाद में उनकी मौत हो गई थी।

फ़ैसले में जज तबस्सुम खान की अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे यह साबित कर दिया है कि सभी दोषियों ने हमले में भाग लिया था और मृतक के साथ ‘बेहद क्रूरता’ से मारपीट की गई थी।

निर्णय के बाद दी गयी धमकियां
निर्णय के तुरंत बाद दोषियों के परिजनों ने अदालत परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस वाहन को रोकने की कोशिश की। इसके बाद सोशल मीडिया पर जज तबस्सुम खान को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया। कई पोस्ट और वीडियो में उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई और कथित तौर पर धमकियां भी दी गई। इसी घटनाक्रम को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई शुरू की।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन भी आया समर्थन में
इस बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन यानी एससीबीए ने भी जज तबस्सुम खान को मिली धमकियों की कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन ने जारी बयान में कहा कि न्यायिक कर्तव्य निभाने वाले किसी भी न्यायाधीश को धमकाना, डराना या सोशल मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। बार एसोसिएशन ने कहा कि जिला न्यायपालिका देश की न्याय व्यवस्था की रीढ़ है और न्यायाधीशों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि वे अपने संवैधानिक दायित्व निभाते समय कानून उनके साथ खड़ा रहेगा। एससीबीए ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और राज्य सरकार से मांग की है कि धमकी देने वाले सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन भी जज तबस्सुम खान के समर्थन में बयान जारी कर चुकी है।

निर्णय से असहमत हैं तो ऊपरी अदालत में अपील करें
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हाई कोर्ट का साफ़ संदेश मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ़ किया कि किसी न्यायाधीश के फ़ैसले से असहमति होने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन न्यायाधीशों को धमकाना या उन्हें डराने की कोशिश करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को निडर होकर काम करने का माहौल उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *