
[ अजय कुमार ]
मोदी का आपातकालीन संदेश एवं संकेत
मे डे (Mayday) कॉल विमानन और समुद्री संचार में उपयोग किया जाने वाला सबसे गंभीर आपातकालीन संकेत है, जो सीधे खतरे (Life-threatening danger) का संकेत देता है। पायलट या नाविक इसे रेडियो पर लगातार तीन बार “मेडे, मेडे, मेडे” बोलते हैं, जिसका मतलब है “मुझे मदद करो” (फ्रांसीसी शब्द ‘m’aider’ से संबंधित)।
- मे डे कॉल की मुख्य विशेषताओं के अनुसार इंजन फेल होना, आग लगना, गंभीर यांत्रिक विफलता या जहाज/विमान के डूबने या गिरने का खतरा हो तो…
- इसे रेडियो पर तीन बार कहा जाता है ताकि एटीसी (Air Traffic Control) या अन्य जहाजों को तुरंत सूचित किया जा सके…
- इस काॅल कद मिलते ही राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू हो जाता है और उस विमान/जहाज को प्राथमिकता मिलती है…
- यह मे डे काॅल “पैन-पैन” (PAN-PAN) कॉल से अलग है, जो आपात स्थिति के लिए है लेकिन तुरंत जान का खतरा नहीं होने पर इस्तेमाल होता है…
हैदराबाद :
बस ऐसे ही एक मे डे काॅल या पैन-पैन काॅल (भाषण) या ज्ञान काॅल, नरेन्द्र मोदी ने जनता को राष्ट्रीय कर्तव्यों की याद दिलाते हुये हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए किया।
मोदी प्रचारमंत्री से वापस फिर प्रधानमंत्री बने…
प्रचारमंत्री अब प्रधानमंत्री की तरह बातें कर कर रहे हैं क्योंकि पांच राज्यों के चुनाव खत्म हो गये हैं और आगे एक साल तक प्रचारमंत्री के लिये चुनाव नहीं है। कल ही गुजरात में भी एक सभा को संबोधित किये, जिसमें जनसाधारण को जबरदस्ती 1200 से अधिक बसों से लाया गया, ये बसें शायद हवा-पानी से चलती है।
ईंधन बचायें नहीं तो मोदी सरकार को भी…
प्रधानमंत्री आम जनता को संदेश दे रहे हैं कि ईंधन की बचत करें और ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ (घर से काम करने) की प्रथा पुनः शुरू करें। यात्रा व आयात पर सीमाएं की सीमायें तय करें। यह आग्रह ऐसे समय में किया गया है जब वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है, जिसे संभालने का काम जनता का है, अपनी सरकार की अक्षमता को छिपाने, लोगों को देशप्रेम सिखा रहे हैं।
कोरोना काल की याद – पुनः नाकामियों की याद
मोदी ने लोगों को कोरोना महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर अपनाये गये नियमों को याद दिलाया, तब भारत में ईंधन का उपयोग कम हो गया था।
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में, हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर विशेष ज़ोर देना चाहिए। ये बातें मोदी को अब समझ आ रही है जब देश की विदेश नीति और अर्थ व्यवस्था का अति बुरा हाल हो चुका है।
सार्वजनिक वाहनों के उपयोग की सीख
मोदी ने लोगों से यह भी अपील की कि वे ईंधन बचाने के लिए मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और जहाँ संभव हो, कार-पूल करें। यह संदेश जन कर्तव्यों को फलीभूत कर देश को बचाने का है, लेकिन स्वयं की सरकार की यात्राओं पर लगाम लगाने जैसा, कोई संदेश नहीं है, वो तो हवाई जहाजों मे जनधन से मजे कर रहे हैं और मंत्रियों के लंबे लंबे काफिलों पर ईंधन बचाने की कोई बात नहीं किये।
ईंधन व्यवस्था पर चुप्पी
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश, भारत ने पिछले महीने के आखिर में कहा था कि डीज़ल और पेट्रोल के पंप की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, इस तरह, वैश्विक स्तर पर कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत उन देशों में शामिल है जिन्होंने अभी तक कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, तेल की कीमतें बढ़ने से बेलगाम महंगाई पर और ज्यादा असर पड़ेगा।
जनता सोना ना खरीदे : हम विधायक खरीदते रहेंगे
मोदी ने लोगों से सोने की खरीद से बचने का आग्रह किया, जिस पर भारत शादियों के दौरान भारी खर्च करता है और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कम से कम एक साल तक गैर-ज़रूरी विदेश यात्राओं में कटौती करने को कहा, लेकिन राज्य सरकारों में तोड़फोड़ करने या सांसद-विधायक खरीद फरोख्त में मोदी को परहेज गुरेज नहीं है।
खाना भी कम खाओ
मोदी ने भारतीय परिवारों से खाना पकाने वाले तेल की खपत कम करने का आग्रह किया और इस कदम को सेहतमंद और देशभक्तिपूर्ण दोनों बताया, लेकिन यह नहीं बताये कि गोमांस और मछली तलने में ज्यादा खाद्य तेल की जरुरत होती है, मांसाहारी भाजपाईयों के लिए कोई संदेश नहीं दिये।
धरती का सीना मोदी सरकार चीर रही है और…
मोदी ने किसानों से उर्वरक का इस्तेमाल भी आधा करने को कहा, बोले कि रासायनिक खाद से धरती मां रो रही है, लेकिन यह नहीं बताये कि भारत की धरती जंगलों के काटे जाने से दहाड़ मारकर रो रही है, मोदी तंत्र अब दोहरी विकलांगता की शिकार हो चुकी है, अंधेपन ने बाद अब बहरी भी हो गयी है, इन सबको व्यवस्थित करने अब आम भारतीयों को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा, सरकारी अक्षमताओं या नाकामियों को सुधारने की जिम्मेदारी, चुनी हुई सरकार की नहीं बल्कि आम भारतीय जनता की जिम्मेदारी है।
(राइटर्स-द हिन्दू-डा. राकेश पाठक)