[ अजय कुमार ]
भ्रष्टाचार जी… जय जय श्रीराम
- नेताओं-अधिकारियों की लालसा…
- लालसा…निर्वाचित नेताओं में कूट-कूट भरा होता है…
- पीछे से अधिकारीगण भी शामिल…
- शासकीय नीतियों/योजनाओं में कमीशनखोरी का उल्लेख नहीं…
- खबर जो मंत्रालय की दीवारों और कमरों से गूंजते हुए बाहर निकली…
- भ्रष्ट आचरण का अंत नहीं हो ही सकता… असंभव…
- महाभारत के दुष्शासन का 21वीं सदीय प्रश्न…
श्रीराम जी आप तो भारतीय हैं… फिर आपके नाम पर…
छत्तीसगढ़ के स्कूली शिक्षा विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग, कृषि विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, जहां केंद्रीय योजनाओं के तहत 60 प्रतिशत केंद्रीय राशि और 40 प्रतिशत राज्यीय राशि से उक्त विभागों में सामानों की खरीदी, राज्य शासन के नियमानुसार खादी ग्रामोद्योग विभाग से की जाती है।
साड़ी है कि न्यारी है कि… भ्रष्टाचारी है…
लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ी खरीदी को लेकर जो आरोप लगे कि 2024-25 में जो साड़ी खरीदी गई और जिसे आंगनवाड़ी महिलाओं को वितरित की गयी, वह घटिया पाई गयी, साड़ियां प्योर सूती थी, उसका यह दुष्परिणाम होना ही था।
2025-26 के लिए जो साड़ियां खरीदी की जानी थी, उसमें सप्लायर ने स्पष्ट लिख कर दे दिया था कि यह सारी साड़ियां धुलने के बाद सिकुड़ भी जाएगी और इसमें गारंटी कम रहेगी। इसलिए महिला बाल विकास विभाग को चाहिए कि इस पर पुनर्विचार कर, दूसरी साड़ियां खरीदने के बारे में निर्णय लें।
सप्लाई से इंकार…
सप्लायरों ने साड़ी सप्लाई करने से इनकार कर दिया, जिससे खादी ग्राम उद्योग विभाग से आर्डर सप्लायरों को मिला था, यह मामला अभी अधर में हैं, विचाराधीन हैं….
खरीदी होने जा ही रही थी कि…
सूत्र बता रहे हैं की आदिम जाति कल्याण विभाग में कुछ खरीदी होने जा रही है, इसको लेकर मीडिया में भी हलचल बहुत तेज है, वैसे तो मीडिया को तीसरी आंख कहा जाता है, लेकिन मीडिया के लोग जिस तरीके से आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों और मंत्री को मोबाइल के माध्यम से संदेश पहुंचा रहे हैं कि सप्लाई का आर्डर सही व्यक्ति को मिलना चाहिए, भ्रष्टाचार करने वाले को नहीं मिलना चाहिए, यह निर्देश उन्हें जिन्हें खरीदी हेतु, राशि खादी ग्रामोद्योग विभाग में ट्रांसफर किये होंगे, को स्पष्ट निर्देश दिया जावे।
लालसायितों की बंद कमरे में चर्चा…
अब संबंधित अधिकारियों ने आज 23 अप्रैल 2026 को नया रायपुर के मंत्रालय के बंद कमरों में चर्चा की, कि खरीदी कैसे की जाएगी ? क्या नीति अपनाई जाएगी ? क्या इसकी जानकारी हमें पत्रकार देंगे, सभी ने नाराजगी भी व्यक्त की, कि अनावश्यक हस्तक्षेप बढ़ रहा है मीडिया ट्रायल बढ़ रहा है।
सीएम को मंत्री अवगत कराये : सीएम साहब बोले… नो अनियमितता
इसी बात को लेकर उपरोक्त चारों मंत्रालय के मंत्री हाल ही में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री से मिलकर पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि मीडिया ट्रायल बहुत बढ़ चुका है और सप्लायर सप्लाई करने में अब पीछे हटने लगे हैं, ऐसे में तो सरकार की नीतियों का ठीक ढंग से पालन नहीं हो पाएगा।
उपरोक्त विभाग के चारों मंत्री को, मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश कि अनियमितता नहीं होनी चाहिए, सामग्रियों की गुणवत्ता, अच्छी होनी चाहिए, शासन की खरीदी राज्य की नीतियों का पालन होना चाहिए और अगर मीडिया ट्रायल होता है तो इससे हमें घबराना नहीं चाहिए, यह तो मीडिया का काम ही है।
मीडिया महत्वहीन…
अब देखना यह है कि जिन मंत्रियों और अधिकारियों के बीच इस विषय पर क्या चर्चा होती है और अधिकारियों का मंत्रालय में अपने बंद कमरों में अधीनस्थ अधिकारियों को क्या निर्देश दिया जाता है। यह कि अनावश्यक रूप से मीडिया को महत्व न दिया जावे और क्या सरकार की पॉलिसी मीडिया तय करेंगे कि किसे ऑर्डर देना है और किस आर्डर नहीं देना है, यह शासन की नीति के अनुसार तय होगा।
शासकीय नीतियों में कमीशनखोरी का उल्लेख नहीं
किन्तु अधिकारीगण यह भूल गये कि शासन की नीतियों में कहीं भी कमीशनखोरी का उल्लेख नहीं है, शायद यह बात मंत्रालय के आईएएस अधिकारियों ने भूलवश अधीनस्थ अधिकारियों को स्पष्ट नहीं कर पाये या फिर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की लालसा को स्पष्ट नहीं कर पाये।
असीमित चाहत…
नेता लालसा के विषय में बता दूं कि असीमित लालसायें, केवल भारतीय जनता पार्टी की नहीं है, बल्कि प्रत्येक राष्ट्रीय और राज्यीय स्तर के नेताओं में कूट-कूट कर भरा होता है, इसी अदृश्य लालसाओं को उच्च अधिकारीगण जमीनी स्त पर क्रियान्वित करते हैं और तब मीडिया का रोल शुरू होता है।