
[ अजय कुमार ]
- कांग्रेस, देश में अपनी स्थिति मालूम करे…
- आईएनसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हवा में ना उड़े…
- दोनों अपने-अपने इर्दगिर्द चिपकने वाले नेताओं से दुर रहें…
- हकीकत जानकार होश उड़ जायेंगे…
नई दिल्ली :
कुछ दिन पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तमिलनाडु में कहा था कि “कांग्रेस ही भाजपा को हरायेगी”… जनसभा को संबोधित करते हुये कहा था।
अब देश की जनता राहुल गांधी से सवाल पूछ रही है कि कैसे हरायेंगे गांधी जी ?
अब सच्चाई जान लें मल्लिकार्जुन और राहुल…
2009 के लोकसभा चुनाव में आख़िरी बार कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था, उस चुनाव में कांग्रेस ने 440 उम्मीदवार खड़े किए थे, इनमें से 209 सीटों पर उसे जीत मिली थी। चूंकि लोकसभा में बहुमत के लिए ज़रूरी आंकड़े से कम थे इसलिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार दोबारा बनी।
इससे पहले 2004 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ़ 145 सीटें ही मिलीं थीं, जबकि उसने 417 सीटों पर चुनाव लड़ा था, कांग्रेस ने सबसे ज़्यादा 529 सीटों पर चुनाव 1996 में लड़ा था।
चुनाव वर्षवार सूची
कांग्रेस किस साल कितनी सीटों पर लड़ा चुनाव –
1989 – 510
1991 – 487
1996 – 529
1998 – 477
1999 – 453
2004 – 417
2009 – 440
2014 – 464
2019 – 421
लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने 301 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे और कुल 99 सीटें जीतीं, इन 99 सीटों में से प्रमुख सीटों में तमिलनाडु में 9, केरल में 18, कर्नाटक में 9, महाराष्ट्र में 13, तेलंगाना में 8, राजस्थान में 8, पंजाब में 7, असम में 3 और बिहार में 3 सीटें शामिल हैं, इसके अलावा, पार्टी ने छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और चंडीगढ़ में भी सीटें हासिल कीं।
कांग्रेस की 99 सीटों की मुख्य विशेषताएं (क्षेत्रवार)
दक्षिण भारत : कांग्रेस का प्रदर्शन यहां काफी मजबूत रहा, जिसमें तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना से बड़ी संख्या में सीटें मिलीं।
उत्तर/पश्चिम भारत : राजस्थान (8) और हरियाणा (5) में उल्लेखनीय सुधार हुआ।महाराष्ट्र में कांग्रेस ने गठबंधन के साथ 13 सीटें जीतीं।
अकेले लड़े राज्य : गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा, जहाँ उन्होंने 64 में से केवल 2 सीटें जीतीं।
हकीकत में कहां है कांग्रेस : अंतरण आत्मा में झांके
99 सीट मे से कांग्रेस महाराष्ट्र में 17 सीटों पर चुनाव लड़ी, 13 सीट जीते…कैसे, महा विकास अघाड़ी (MVS) से गठबंधन के बदौलत, उत्तर प्रदेश में 17 सीटों पर चुनाव लड़ी, 6 जीते…समाजवादी पार्टी और अन्य से गठबंधन… बिहार में 9 सीटों पर चुनाव लड़े, 3 जीते, आरजेडी और अन्य के गठबंधन की वजह से, तमिलनाडु 9 में से 9 सीट, डीएमके-अन्य से गठबंधन, पंजाब 13 सीट पर चुनाव लड़े, 7 जीते, आम आदमी पार्टी से गठबंधन के कारण, पश्चिम बंगाल में 7 सीटों पर चुनाव लड़े, एक जीते, टीएमसी से गठबंधन, केरल 16 सीटों पर उम्मीदवार मैदान में उतारे, 14 जीते, कम्युनिस्ट पार्टियों से गठबंधन था।
अकेले लड़े तो अकेले रह गये
गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में, जहां सीधा 64 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी से मुकाबला हुआ, वहां तो केवल 2 सीटें जीते, प्रतिशत में कहें तो शून्य से नीचे…फिर कांग्रेस ही भारतीय जनता पार्टी को कैसे हरा पायेगी, पहले यह स्पष्ट करें।
कांग्रेस के भीतर आईटी सेल…
दरअसल कांग्रेस में आईटी सेल की भरमार है, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के इर्दगिर्द आईटी सेल के नेता, कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं, नुकसान पहुंचाने की बात उजागर होने के बाद भाजपा में शामिल हो जाते हैं, अबतक भाजपा शासित राज्यों के नेताओं पर नजर डालें या फिर उदाहरण के तौर पर बता दूं कि भाजपा के देश में अबतक 58 मुख्यमंत्री हुए, जिसमें से 40 का संबंध आर एस एस से रहा, 11 मुख्यमंत्री दूसरे दलों से आये नेता रहे थे या हैं, असम और पुद्दुचेरी में अभी शपथ ग्रहण शेष है।