
[ अजय कुमार ]
राज्य में हालात बेकाबू…
अलनीनो के प्रभाव से देश सूखे की परिस्थितियों में है, किन्तु छत्तीसगढ़ राज्य में जो राजनीतिक अलनीनो इफेक्ट दिख रहा है, उसके मुताबिक जब सिर्फ 5 दिन बाद 23 जून को कैबिनेट की बैठक होना तय है, तो फिर 18 जून की रात्रि 9:00 बजे मुख्यमंत्री निवास में प्रदेश के सभी मंत्रियों को हर हालत में उपस्थित होने का निर्देश क्यों जारी किया गया।
चर्चा में बताई जा रही है कि 5 घंटे की मैराथन बैठक जो रात्रि 2:00 तक चली, वह 23 जून को भी हो सकते थे केबिनेट की बैठक के बाद या कैबिनेट की बैठक के पहले।
सरकार-संगठन बैठक में साथ-साथ
लगभग हलचल तेज हो चुकी थी कि क्या कुछ नई दिल्ली से निर्देश मिला है और क्या मंत्रियों की कार्यप्रणाली का सामूहिक परीक्षण किया जाएगा। इस बैठक में विशेष रूप से क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश महामंत्री संगठन पवन साय को भी आमंत्रित किया गया था वे दोनों भी रात्रि 2:00 बजे तक बैठक में उपस्थित थे. ….
शर्मा और रामविचार के मीडिया में बयान
लेकिन रात्रि 2:00 बैठक समाप्त होने के बाद आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम और उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने वहां उपस्थित पत्रकारों से कहा कि ढाई साल सरकार के कार्यकाल की समीक्षा की गई और आने वाले ढाई साल में सरकार छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास में क्या-क्या कर सकती है उसके बारे में गंभीरता से चर्चा हुई और संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बना रहे इस पर गंभीरता से चर्चा हुई. ….
सुशासन तिहार का डरावना फीडबैक
तो क्या यह चर्चा करने के लिए ही मंत्रियों को विशेष सूचना देकर बैठक में बुलाया गया था दोनों मंत्रियों की बात प्रदेश की जनता और राजधानी रायपुर की जनता को डाइजेस्ट नहीं रहा है, जबकि इस संबंध में संगठन के कुछ प्रदेश स्तरीय प्रमुख पदाधिकारी और सरकार के कुछ मंत्रियों से चर्चा की गई तो उन्होंने नाम उजागर नहीं करने के शर्त पर सच्चाई यह बताई की एक महीने तक छत्तीसगढ़ सुशासन तिहार आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में जो फीडबैक आया है, वह काफी डरावना है।
खुफिया तंत्र का फीडबैक और भी डरावनी
इतना ही नहीं राज्य की इंटेलीजेंस और केंद्र के इंटेलीजेंस ने जो रिपोर्ट दी है, जिसमें स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की छवि जमीनी स्तर पर तेजी से गिर रही है, जनता में तो नाराजगी है ही, मतदाताओं को मतदान केंद्र में पहुंचने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं में भी गंभीर नाराज की पैदा होती जा रही है, जो पार्टी या सरकार के लिए अच्छा संकेत नहीं है, खासकर 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए. …
सामंजस्य का अभाव
वैसे सूत्र यह भी बता रहे हैं की छत्तीसगढ़ का ब्यूरोक्रेट्स जिला से लेकर नया रायपुर के मंत्रालय तक, पुलिस मुख्यालय से अरण्य भवन में भी, जैसा सहयोग, सरकार को मिलना चाहिए और मंत्रियों के साथ कदम से कदम मिलाकर रहना चाहिए, वह नजर नहीं आ रहा है।
जिला स्तर पर भी पार्टी के नेता, जब जनता की समस्या को लेकर जिलों में पदस्थ अधिकारियों से चर्चा की जाती है, तो उनका रिस्पांस उचित नहीं रहता। कार्यकर्ताओं की गंभीर नाराजगी का समाधान नहीं हो पा रहा हैं, कुछ मंत्रियों में भी गंभीर नाराजगी है कि ब्यूरोक्रेट्स को आखिर नियंत्रित कौन कर रहा है। ऐसा कौन सा अदृश्य शक्ति है जो उन्हें प्रेरित कर रहा है कि मंत्रियों का आदेश का पालन न करें और जो स्थान बताया जा रहा है वहां से मार्गदर्शन ले, आखिर वह कहां है और उसे किस अदृश्य शक्ति से निर्देश मिलते हैं, आपका दिल-मन जो मान रहा है, शायद वही है।
दिल्ली से मिल रहे निर्देशों का ही पालन
पार्टी के कुछ प्रदेश पदाधिकारयों और मंत्रियों का कहना है कि अधिकांश निर्णय नई दिल्ली से हो रहे हैं और अधिकारी स्पष्ट कहते हैं कि जो निर्देश नई दिल्ली से मिले हैं, हम उसका पालन कर रहे हैं।
बात यहीं तक रहती, तो ठीक रहता…
अब सूत्र यह भी बता रहे हैं 2004 से 2018 तक छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार में एक गैर आईएएस अधिकारी, इतना पावरफुल हो गया था कि उसके सामने सरकार भी असहाय नजर आ रही थी, निर्णय सब लगभग वही ले रहे थे, सरकार उसका सिर्फ अनुमोदन कर रही थी। ऐसी चर्चा खुलकर मंत्रालय, पुलिस मुख्यालय और अरण्य भवन के साथ पार्टी के नेताओं में भी चर्चा का विषय बन चुका था, जो कि लगभग कटु सत्य है/था।
अब कहा जा रहा है कि वही ब्यूरोक्रेट अब देश के एक ताकतवर उद्योगपति के संस्थान में बड़े पद और बड़ी वेतन पर काम कर रहे हैं और सूत्र जो बता रहे हैं उन्हें महत्वपूर्ण जवाबदारी छत्तीसगढ़ और उड़ीसा का दिया गया है, दोनों जगह बीजेपी की सरकार है और सूत्र यह भी बता रहे हैं की दोनों राज्य में मंत्रालय में काम करने के लिए जो भी उद्योगपतियों के हित की बात है उसे पर कोई रुकावट ना आए।
नई दिल्ली टू रायपुर और सारे काम ओके
नई दिल्ली से रायपुर आकर नया रायपुर में मेफेयर होटल में रुक कर सभी काम सफलतापूर्वक करवा कर चले जाते हैं, चर्चा तो यह भी है कि मुख्यमंत्री निवास के अधिकारी भी उनके आदेश मिलने को, अपना सौभाग्य मानते हैं और आदेशों का परिपालन भी ऐसे, जो छत्तीसगढ़ राज्य के लिए पूर्णतः अहितकारी ही सिद्ध होगा।