
- महिला बाल विकास विभाग और स्कूली शिक्षा विभाग के बाद अब चर्चा में आ गई है आदिम जाति कल्याण विभाग…
- आदिम जाति कल्याण विभाग में जरुरतमंद अस्त-व्यस्त…
- विभाग के अधिकारी कर्मचारी दिलेर और ताकतवर (लक्ष्मी हौसला बनाये रखती है)…
- आज 27 अप्रैल 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में हलचल हुई…
- सक्रिय तीसरी आंख को भी अप्रिय स्थिति से गुजरना पड़ा…
- पत्रकार को सलाह ना देने की, उच्च अधिकारी ने दिया सलाह…
रायपुर :
महानदी भवन अर्थात् मंत्रालय के ही विश्वसनीय सूत्र के अनुसार, मंत्रालय के एक प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी ने एक पत्रकार से स्पष्ट रूप से कहा कि आप हमें यह बताइए की कहां भ्रष्टाचार हुआ है, उसे आप उजागर करिए और उचित होगा तो हम इसके जांच करवाएंगे, लेकिन यह सुझाव आप मत दीजिए कि किस सप्लायर को काम देना है और किसे नहीं देना है।
पत्रकार को नेक सलाह या अनेक सुझाव
जब हम छत्तीसगढ़ खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को फंड ट्रांसफर करेंगे और वह अपनी प्रक्रियागत शर्तों के अनुसार खरीदी की प्रक्रिया प्रारंभ करेगी और जब सप्लायर सामान सप्लाई कर लेगा और उसे जिलों में वितरित किया जाएगा, उस समय उसकी गुणवत्ता की जांच की जाएगी और उचित और माप दंड में सही पाए जाने पर ही वितरण की प्रक्रिया प्रारंभ की जावेगी। आप चाहे तो जिलों में, वितरित सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच के बारे में पता कर सकते हैं और अगर आपको लगे कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है तो आप समाचार पत्रों में उजागर करके जांच की मांग कर सकते हैं, इसके लिए आप स्वतंत्र हैं, लेकिन हमें अनावश्यक रूप से सुझाव देकर मीडिया ट्रायल करने का प्रयास न करें…
गद्दा तकिया, बर्तन में भी भ्रष्टाचार
सूत्र बता रहे हैं कि राज्य के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा छात्रावासों और आश्रमों के लिए पलंग, गद्दे, तकिए, बर्तन, आलमारी, फर्नीचर और खेल सामग्री जैसी वस्तुओं की खरीद की जाती है।
खरीदी की प्रक्रिया आदिम जाति कल्याण विभाग (Tribal Welfare Department) में चल रही है जो करीब 40 करोड़ के आसपास की हो सकती है और उसे शासन के नियमानुसार छत्तीसगढ़ खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के माध्यम से खरीदी की जाएगी…
निरंतर भ्रष्टाचार : न्याय व्यवस्था ठहरी हुई
उदाहरण के तौर पर बता दूं कि छत्तीसगढ़ में बीते कई वर्षों से इस विभाग में भ्रष्टाचार के मामले निरंतर सामने आ रहे हैं, जिसमें फर्जी बिलों के माध्यम से शासकीय धन का आहरण, सप्लायर से, कम संख्या में गुणवत्ता विहीन सामग्रियां रिसीव कर अधिक सामग्री का भुगतान करना और दोगुनी कीमत पर सामग्री क्रय का आदेश देना, जैसे भ्रष्ट आचरण में शामिल व्यवहार के कारण विभाग सुर्ख़ियों में रहता है।
सुस्त जांच और न्याय व्यवस्था : निलंबित होना स्टेटस सिंबाॅल
किन्तु सुस्त आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और न्यायालय में लंबित प्रकरणों के कारण भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद है, आजकल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का निलंबित होना स्टेसस सिम्बाॅल बन चुका है।
आदिम जाति कल्याण विभाग में अधिकारी, जिला कार्यालय प्रमुख होने के साथ-साथ, भंडार अधिकारी, वाहन अधिकारी, क्रय अधिकारी की भूमिका में भी होते हैं।