राज्य में पूर्व ब्यूरोकेट का दबदबा कायम

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राज्य में पूर्व ब्यूरोकेट का दबदबा कायम

[ अजय कुमार ]

रायपुर :
अब मंत्रियों का रोना शुरू
छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार के अधिकांश मंत्री और अधिकांश महत्वपूर्ण निगम, मंडल, आयोग, प्राधिकरण के अध्यक्ष, अब परेशान हो चुके हैं और मुख्यमंत्री के पास अपनी फरियाद पहुंचा चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई न्याय नहीं मिल रहा है और मंत्री एवं अध्यक्ष लोग अब आपसी बातचीत में यह बोलने लगे हैं। इन नेताओं का कहना है कि पार्टी के बड़े नेताओं के समक्ष वे बदनाम हो रहे हैं और अनियमित काम करने के लिए इतना दबाव आता है कि वे खुद परेशान हो चुके हैं।


छत्तीसगढ़िया मंत्रियों -नेताओं की पीड़ा

मंत्रियों और निगम अध्यक्षों के कार्यालयीन सूत्र ही बता रहे हैं, हालांकि 21वीं-सदी.इन इसकी पुष्टि नहीं कर सकता, लेकिन दर्द तो हमारे छत्तीसगढ़िया नेताओं का ही है, उनका कहना है कि “मध्य प्रदेश के जबलपुर से अनुषांगिक संगठन के प्रभावशाली पदाधिकारी, राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर समिति के प्रभावशाली पदाधिकारी, प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर के पदाधिकारी एवं अन्य ऐसे ही प्रभावशाली स्थानों से सप्लाई का काम, ठेकेदारी का काम, ट्रांसफर का काम और अपने यहां स्टाफ रखने के लिए जबरदस्त दबाव आ रहा है। अब यह निरर्थक दबाव, हमारे बस की नहीं रह गई हम सिर्फ बदनाम हो रहे हैं।”


नया रायपुर मंत्रालय पूर्व ब्यूरोकेट के चंगुल में
बात यहीं तक रहती, तो ठीक था, इस समस्या का नई दिल्ली को नियंत्रित करना चाहिए।
लेकिन. …
क्या नई दिल्ली से, एक छत्तीसगढ़ सरकार में महत्वपूर्ण और ताकतवर ब्यूरोक्रेट रहे, जो वर्तमान में देश के एक जबरदस्त पावरफुल उद्योगपति के यहां सेवाएं दे रहे हैं, उनका महीने दो महीने में एक बार राजधानी रायपुर आना और नया रायपुर के होटल मेफेयर में रुककर, नया रायपुर के मंत्रालय, पुलिस मुख्यालय, अरण्य भवन के अधिकारियों को दिशा निर्देश देकर और कुछ फाइल अगर पेंडिंग है तो उसे दो दिन के अंदर क्लीयर करने का निर्देश देकर और अपना काम (अपना काम मतलब प्रभावशाली उद्योगपति का काम) हर हालत में करवा कर ही वापस नई दिल्ली चले जा रहे हैं, छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व ब्यूरोक्रेट को मुख्यमंत्री सचिवालय के एक ताकतवर ब्यूरोक्रेट जो मुख्यमंत्री के इशारे पर नहीं बल्कि इन्ही पूर्व ब्यूरोक्रेट के इशारे पर चल रहे हैं, उनका भी भरपूर समर्थन हैं और नई दिल्ली के काम में कोई रुकावट ना आए, उसके लिए पूरी तरह चाक चौबंद रहते हैं…


नई दिल्ली से छत्तीसगढ़ सरकार नियंत्रित

हकीकत में या कहने के लिए तो भाजपा की सरकार है और उसके मुख्यमंत्री और मंत्री हैं, लेकिन क्या उसे नियंत्रित, नई दिल्ली से कोई दूसरा ही कर रहा है। लगभग अब सरकार के उपरोक्त तीनों व्यवहारिक विभागों में दमखम के साथ यह बात तैर रही है और लगभग उनके प्रभाव में आ चुके हैं…


सरकार संगठन ध्यान दे
छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार और संगठन को गोपनीय रूप से इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि चाहे वह आईएएस, आईपीएस या आईएफएस हो और खासकर वे अधिकारी जो सेवानिवृत होने वाले हैं वे इन पूर्व ब्यूरोक्रेट के प्रभाव में ताकतवर उद्योगपति के लिए काम कर रहे हैं, कहीं रिटायरमेंट के बाद उद्योगपति के यहां महत्वपूर्ण पद पर तो नहीं जाने वाले हैं, नुकसान छत्तीसगढ़ का होगा इसे संज्ञान में लेना होगा, क्योंकि छत्तीसगढ़ के जल, जंगल और जमीन पर ताकतवर उद्योगपति की तिरछी नजर दशकों से लगी हुई है, इन्हीं ब्यूरोकेट के कारण 2018 में भाजपा 14 सीटों में सिमटकर रह गयी थी।


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