मुख्यमंत्री का संपत्ति विवाद

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[ अजय कुमार ]

  • ‘क्या हमें उसके लिए, काम बंद कर देना चाहिए?’ : जांच पर मोहन यादव का परिवार

उज्जैन/भोपाल :
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री यादव और उनके परिवार ने दिसंबर 2023 में पदभार संभालने के बाद से उज्जैन में लगभग 45 करोड़ रुपये में 168 एकड़ जमीन और 137 से अधिक प्लॉट खरीदे हैं। यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट में सामने आई है।

इन जमीनों की खरीद मुख्यमंत्री की पत्नी, बहू, भाई, चचेरे भाई और उनके परिवार के स्वामित्व वाली रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से की गई है, अधिकांश जमीनें उज्जैन के उन क्षेत्रों में खरीदी गई हैं, जहां मोहन यादव की सरकार ने बाद में नई सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की घोषणा की।इन नई खरीदों के बाद, यादव परिवार के पास कुल जमीन का दायरा बढ़कर 300 एकड़ से अधिक हो गया है।

अधिकारियों का कहना है कि…
मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर, उज्जैन में सीएम मोहन यादव के परिवार द्वारा ज़मीन की खरीद-फरोख्त पर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच के नतीजों का खंडन किया। उनका तर्क है कि उनके परिवार का रियल एस्टेट का कारोबार उनके राजनीति में आने से पहले से चल रहा है और इसे उनके पद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

प्रश्नो का जवाब नहीं मिला
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी जांच के नतीजों के बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके दफ्तर को एक विस्तृत प्रश्नावली भेजी थी, लेकिन किसी ने भी उस पर कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, राज्य सरकार के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार की खरीदारी और सरकार में उनकी मौजूदगी को आपस में जोड़ना “सही नहीं” है।

पहले से रियल एस्टेट का व्यापार
एक अधिकारी ने कहा, “मुख्यमंत्री का विस्तारित परिवार काफी समय से रियल एस्टेट के कारोबार में है। उनके कारोबार को मुख्यमंत्री के राजनीतिक उत्थान से जोड़ना उचित नहीं होगा।”

अधिकारी ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री की संपत्ति के बारे में बात करते समय उनके करीबी परिवार से आगे की बात करना भी “सही नहीं” है: “जब आप उनके परिवार की बात करते हैं, तो उसमें केवल उनकी पत्नी, बेटे और बहू को ही शामिल किया जाना चाहिए… और वहां आपको शायद कोई बड़ी बात न मिले।”

खरीदी-बिक्री चलता रहता है
एक और सीनियर अधिकारी के मुताबिक, ज़मीन के सभी सौदे सिर्फ़ प्लॉट खरीदने के लिए नहीं थे, बल्कि कुछ मामलों में बाद में उन्हें बेच भी दिया गया था। अधिकारी ने कहा, “खरीदे गए सभी प्लॉट हमेशा अपने पास नहीं रखे जाते। कारोबार के तहत उन्हें बेचा भी जाता है।”

मोहन यादव के चचेरे भाइयों गोविंद और निलेश की ओर से जवाब देते हुए, गोविंद यादव के बेटे अनंत यादव ने कहा कि “हमारा परिवार 2010 से रियल एस्टेट के कारोबार में है, जब मेरे पिता ने 100 बीघा ज़मीन पर प्रोजेक्ट डेवलप किया था। मेरे चाचा के कई हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं। निजी व्यक्ति के तौर पर, हमें किसी भी निजी ज़मीन को खरीदने, डेवलप करने या बेचने का पूरा अधिकार है। क्या हमें सिर्फ़ इसलिए अपना काम बंद कर देना चाहिए क्योंकि मुख्यमंत्री हमारे परिवार से हैं?

कई भागीदार हैं
उज्जैन के गंगेडी में चल रहे प्रोजेक्ट के बारे में उन्होंने कहा: “मेरे पिता इसके अकेले मालिक नहीं हैं। उनके छह-सात बिज़नेस पार्टनर हैं। भले ही यह 2023 में रजिस्टर हुआ हो, लेकिन ज़मीन खरीदने की डील 2020 में ही हो गई थी, जब वे (मोहन यादव) मंत्री भी नहीं थे। हाईवे का काम 2019 में ही मंज़ूर हो गया था। यह ज़मीन हाईवे से 100 मीटर दूर है।”

मुख्य बातें –

  • सीएम यादव ने साधी चुप्पी
  • सीएम यादव और उनके ऑफ़िस ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के भेजे गए विस्तृत सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।
  • राज्य के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर परिवार के ज़मीन के लेन-देन का बचाव किया।
  • परिवार के दायरे को सीमित बताया गया
  • अधिकारियों ने तर्क दिया कि जांच में केवल मुख्यमंत्री की पत्नी, बेटे और बहू को ही शामिल किया जाना चाहिए, न कि उनके विस्तारित रिश्तेदारों को।
  • जांच को केवल करीबी परिवार तक सीमित रखा जाए तो “कुछ भी बड़ा” नहीं मिलेगा।
  • सत्ता से पहले ही रियल एस्टेट का काम
  • एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री के राजनीतिक जीवन में आने से पहले से ही उनका परिवार रियल एस्टेट के कारोबार में शामिल रहा है।
  • उनके बिज़नेस को मुख्यमंत्री की सरकारी भूमिका से जोड़कर देखना “सही नहीं” बताया गया।

बचाव में बिक्री का तर्क
अधिकारियों ने बताया कि खरीदे गए सभी प्लॉट अपने पास नहीं रखे गए थे, बिज़नेस के तहत उनमें से कुछ को बाद में बेच दिया गया था।

उन्होंने इन लेन-देन को सामान्य बिज़नेस गतिविधि बताया, न कि राजनीतिक कारणों से की गई खरीद।

चचेरे भाइयों का विरोध
मोहन यादव के चचेरे भाई गोविंद यादव के बेटे अनंत ने बताया कि परिवार 2010 से ही रियल एस्टेट के कारोबार में है, यानी यादव के मंत्री बनने से काफी पहले से।

गंगेडी के मामले में उन्होंने कहा कि ज़मीन के सौदे 2020 के हैं और हाईवे के लिए मंज़ूरी 2019 में ही मिल गई थी, यानी यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले। आरोप प्रत्यारोप के साथ फिलहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की संपत्ति पर विवाद जारी है।


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