केन्द्रीय मंत्री परिषद में फेरबदल जल्द

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[ अजय कुमार ]

आज अपने देश लौट आये प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया का अपना दौरा पूरा करके 19 जून 2026 को नई दिल्ली लौट आए हैं, सूत्र यह भी बता रहे हैं कि 20 जून के बाद किसी भी दिन, केंद्रीय मंत्री परिषद में बड़ा फेरबदल होने की पूर्ण संभावना है और 12 से 15 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है और इनमें से कुछ लोगों को राज्यपाल बनाया जा सकता है, उनके स्थान को भरने के लिए दूसरी पार्टी से आयातित सांसदों को स्थान दिया जाएगा और इसी के साथ जनता दल यूनाइटेड, तेलुगु देशम पार्टी, शिवसेना शिंदे गुट के सांसदों को महत्वपूर्ण विभाग देते हुए मंत्री बनाया जाएगा।

परिसीमन बिल के लिए जद्दोजहद
नई दिल्ली के विश्वसनीय सूत्र यह भी बता रहे हैं कि केंद्र सरकार लोकसभा का विशेष सत्र आमंत्रित कर सकती है और उस सत्र में परिसीमन को लेकर एक बिल लोकसभा के पटल पर रखेगी और उसे दो तिहाई बहुमत से पास करवा कर यह कार्य प्रारंभ करेगी, अगर यह होता है तो 543 लोकसभा के स्थान पर 2029 के लोकसभा चुनाव में यह सीटों की संख्या लगभग 850 पहुंच जाएगी।

सत्तारूढ़, ही रहने की कोशिशें जारी…
इस परिसीमन की प्रक्रिया में उत्तर भारत को लाभ मिलेगा, लोकसभा की सीटें ज्यादा बढ़ेगी और दक्षिण भारत में लोकसभा की सीट बढ़ेगी जरूर लेकिन उसका प्रतिशत कम रहेगा।
इसीलिए धीरे से यह कहा जाता है और यह राग अलापा जा रहा है, केंद्र और राज्यों के द्वारा कि देश का सर्वांगीण विकास का जो नक्शा तैयार किया गया है। 2047 तक का समय इसी आधार पर किया गया है और इसी उद्देश्य को, केंद्र के इशारे पर राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्री, मीडिया के समक्ष बात करते रहते हैं और विधानसभा में भी जोर-शोर से इसी बात की चर्चा करते रहते हैं। जबकि जनता 5 वर्ष के लिए वोट देकर नेता चुनती है लेकिन यह तो सीधा मामला 2047 का बना चुके हैं।

विपक्ष के साथ देश की जनता चिंतित
देश के प्रमुख विपक्षी पार्टी चिंतित हैं, उनके प्रमुख सांसदों को अदृश्य शक्तियों के दबाव में ₹गांधीजी के सहयोग से लगातार दल बदल करवाया जा रहा है। इस घटनाक्रम से देश के मूल मतदाता जो लोकसभा सदस्य निर्वाचित करके नई दिल्ली भेजे हैं, अब उनका कहना है कि हमने जिसको नई दिल्ली भेजा है वह तो ₹गांधीजी के प्रभाव में आ चुका है, अब हमारे वोट का तो चोरी हो चुका है अब हमें न्याय मिलेगा कहां से। बहुत गंभीर स्थिति देश में निर्मित होती जा रही है इसे देश की जनता को गंभीरता से विचार करना होगा कि देश की राजनीति किस दिशा की ओर जा रही है।

चीन रुस की तरह…भारत
क्या हम धीरे-धीरे अप्रत्यक्ष रूप से चीन और रूस की सरकारें जैसे काम कर रही है, जहां एक दलीय व्यवस्था के तहत सरकारें हैं और अपनी ही मनमानी कर रहे हैं, क्या उसी दिशा में भारत का लोकतंत्र आगे बढ़ चुके हैं।


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